Monday, October 31, 2005

माना जिन्दगी मे तेरी जगह नही मेरे लिए, बस दर के बाहर रुक जाने दे,
समय का अगला झोका धकेल देगा, बस संभल भर जाने दे
क्षण मे क्षीण हुआ बल मेरा ना जाने क्यो,
कुछ नया नही, पर इस बार समझ कर जाने दे

0 Comments:

Post a Comment

Links to this post:

Create a Link

<< Home