हम फिर वही पर सामन्जस्य बदल गया
रेत फिर वही पर सागर बदल गया
कल के निशानो पर आज की रेखा
कल के ताप पर आज की हवा
कल के पट पर आज का चित्र
क्या वक़्त रुकेगा या जीवन का समीकरण बद्ल गया ?
रेत फिर वही पर सागर बदल गया
कल के निशानो पर आज की रेखा
कल के ताप पर आज की हवा
कल के पट पर आज का चित्र
क्या वक़्त रुकेगा या जीवन का समीकरण बद्ल गया ?

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