ये कौन जाने ?
रात के काले परदे गिर गए
आँखो के कोने फिर से भर गए
आज बुँदे गिरे या नही कौन जाने ?
हृदय के तार हिले या नही कौन जाने ?
कल का आलम क्या होगा कौन जाने ?
बस यह हाल फिर होगा,
हर सवाल फिर होगा,
अरमानो का कत्लेआम फिर होगा,
जाने या अनजाने ये कौन जाने ?
आँखो के कोने फिर से भर गए
आज बुँदे गिरे या नही कौन जाने ?
हृदय के तार हिले या नही कौन जाने ?
कल का आलम क्या होगा कौन जाने ?
बस यह हाल फिर होगा,
हर सवाल फिर होगा,
अरमानो का कत्लेआम फिर होगा,
जाने या अनजाने ये कौन जाने ?

1 Comments:
wow..
love your poems..
beautiful!!
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