Monday, November 14, 2005

ये कौन जाने ?

रात के काले परदे गिर गए
आँखो के कोने फिर से भर गए
आज बुँदे गिरे या नही कौन जाने ?
हृदय के तार हिले या नही कौन जाने ?
कल का आलम क्या होगा कौन जाने ?
बस यह हाल फिर होगा,
हर सवाल फिर होगा,
अरमानो का कत्लेआम फिर होगा,
जाने या अनजाने ये कौन जाने ?

1 Comments:

Anonymous bani said...

wow..
love your poems..
beautiful!!

6:37 PM  

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