खोज
निकला आज राहो मे,
अस्तित्व कि खोज मे,
फिर आज शुन्य से रुबरु मै था,
मेरा वजूद तेरे परिचय से था
शक्ल बदली या आईने बदल गये,
प्यादे बदले या नियम बदल गये,
रफ्तार बदली या विराम बदल गये,
मेरे होने के मायने बदल गये
अस्तित्व कि खोज मे,
फिर आज शुन्य से रुबरु मै था,
मेरा वजूद तेरे परिचय से था
शक्ल बदली या आईने बदल गये,
प्यादे बदले या नियम बदल गये,
रफ्तार बदली या विराम बदल गये,
मेरे होने के मायने बदल गये

1 Comments:
बहुत अच्छा | गागर में सागर !
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