Friday, November 18, 2005

खोज

निकला आज राहो मे,
अस्तित्व कि खोज मे,
फिर आज शुन्य से रुबरु मै था,
मेरा वजूद तेरे परिचय से था

शक्ल बदली या आईने बदल गये,
प्यादे बदले या नियम बदल गये,
रफ्तार बदली या विराम बदल गये,
मेरे होने के मायने बदल गये

1 Comments:

Blogger अनुनाद सिंह said...

बहुत अच्छा | गागर में सागर !

8:55 PM  

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