Monday, November 28, 2005

ढाई आखर

कोरा कागज ले मैने लिखे थे आखर ढाई
कागज ने धार से फिर चीर एसे लगाई
लहु बहा कागज पर स्याही सा, पर कागज पर न टिकी एक बूँद
आखर ढाई लिखे रह गए, पर कागज ने कलम से ली अँखिया मूँद

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