Thursday, December 29, 2005

अधूरा नशा

गिरा न देना मेरे वस्त्रो पर तुम सुरा,
तुम्हारा भी नशा रह जाएगा अधूरा,
मै जाम मे बह जाउँगा,
एक पल मे ढह् जाउँगा

दोषी मदिरा को न ठहरा देना,
मय अनुभव का भागी बन, मै ही न विराम पाउँगा
कर प्याले को गलत न देना,
छाले कर के है प्याले से, मै ही न थाम पाउँगा

यादे सुबह तक तुम खो दोगी,
मदिरा वस्त्रो पर मेरे रह जाएगी,
छलकी जाम की तरह गुम होगी,
महक मेरे साथ रह जाएगी

गिरा न देना मेरे वस्त्रो पर तुम सुरा,
तुम्हारा भी नशा रह जाएगा अधूरा

Thursday, December 15, 2005

मदिरालय

आज बदला सा था माहौल मदिरालय का,
हवा मे निशान था विचित्र प्रलय का,
दर्द था लावारीस, हर पग प्रणव आलय था,
आज मेला जीने वालो का था,
दिवस पीने वालो का था,
लोक आनन्द समाहित हर घूँट, नशा बाकी न था,
आज कर लिया मदिरापान साकी ने था

Wednesday, December 07, 2005

कभी

मतलब के जीवन का क्षण ले
कभी खोज जीवन का अर्थ ले,
अपना बना लेने वालो को ले,
और कभी अपना बना ले,
कभी आप को खो कर किसी को पा ले,
कभी जीत को परे हटा ले,
कभी हार का उत्सव मना ले

हर पल बीतेगा जीवन क्रिया के हल मे,
बस जा कभी जीवन पशचात के पल मे,
पाने के हिसाब मे है प्रमाण लगा,
कभी खोये का अनुमान लगा

Tuesday, December 06, 2005

मौसम

आज सर्द हवा ने जिगर मे दर्द को सहला दिया,
थोडे से पानी ने ऊन मे लिपटी काया को जला दिया,
बर्फ के हर कतरे ने लबो को सूखा दिया
मेरे घर की छवि ने मेरा आसरा भूला दिया

Sunday, December 04, 2005

रहस्य

खोना अनायास,
हरसम्भव प्रयास,
दूरी जटिल,
व्यवहार कुटिल,
वो पल विकराल,
विचारो का जाल,
अनन्य वर्तमान,
दूर्लभ सम्मान,
न भूत, न भविष्य,
परिष्क्रत जीवन रहस्य