tag:blogger.com,1999:blog-185116182007-05-01T18:21:21.664-07:00Khoye ki kalam sekhoyehttp://www.blogger.com/profile/07167813839368319662noreply@blogger.comBlogger20125tag:blogger.com,1999:blog-18511618.post-1153485223224556172006-07-21T05:31:00.000-07:002006-07-21T05:33:43.233-07:00सहारे की आबरु क्या,वजूद क्या<br />ख्वाब क्या, उम्मीद क्या,<br />जिसका होना बीते खोने के दरमिया,<br />ऊसकी हैसियत क्या, शक्सियत क्या,<br />किसी के सफर का नही इत्तिका<br />ऊसका सफर क्या, मुकाम क्या,<br />जो किसी के हद-ए-ख्याल मे रुबरु ना,<br />वो हैरान क्या, परेशान क्या !khoyehttp://www.blogger.com/profile/07167813839368319662noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-18511618.post-1140905317029589262006-02-25T14:07:00.000-08:002006-02-25T14:08:37.040-08:00जोकर करे ना जोकरी चँहु मौसम काहे,<br />निरन्तर जो करत रहे, पागल ना कहलाए?khoyehttp://www.blogger.com/profile/07167813839368319662noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-18511618.post-1136614575858778082006-01-06T22:12:00.000-08:002006-01-06T22:16:15.866-08:00कुछ बूँदो कोदो पँक़्तियो को जीवन सार ना समझ लेना,<br />कुछ बूँदो को आबक्षार ना समझ लेना<br /><br />लोग है यहाँ ऊथले कई<br />खडे है यहाँ पूतले कई,<br />और जो जमीन मे गडे है,<br />उन पर तो पत्थर पडे है<br /><br />रहने वाले ऊचाई के मचान के,<br />करते गहराई के बयान है<br />दो वचनो को ललकार ना समझ लेना,<br />कुछ बूँदो को आबक्षार ना समझ लेनाkhoyehttp://www.blogger.com/profile/07167813839368319662noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-18511618.post-1135920669445363892005-12-29T21:26:00.000-08:002005-12-29T21:31:09.453-08:00अधूरा नशागिरा न देना मेरे वस्त्रो पर तुम सुरा,<br />तुम्हारा भी नशा रह जाएगा अधूरा,<br />मै जाम मे बह जाउँगा,<br />एक पल मे ढह् जाउँगा<br /><br />दोषी मदिरा को न ठहरा देना,<br />मय अनुभव का भागी बन, मै ही न विराम पाउँगा<br />कर प्याले को गलत न देना,<br />छाले कर के है प्याले से, मै ही न थाम पाउँगा<br /><br />यादे सुबह तक तुम खो दोगी,<br />मदिरा वस्त्रो पर मेरे रह जाएगी,<br />छलकी जाम की तरह गुम होगी,<br />महक मेरे साथ रह जाएगी<br /><br />गिरा न देना मेरे वस्त्रो पर तुम सुरा,<br />तुम्हारा भी नशा रह जाएगा अधूराkhoyehttp://www.blogger.com/profile/07167813839368319662noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-18511618.post-1134650128241964502005-12-15T04:34:00.000-08:002005-12-15T04:35:28.250-08:00मदिरालयआज बदला सा था माहौल मदिरालय का,<br />हवा मे निशान था विचित्र प्रलय का,<br />दर्द था लावारीस, हर पग प्रणव आलय था,<br />आज मेला जीने वालो का था,<br />दिवस पीने वालो का था,<br />लोक आनन्द समाहित हर घूँट, नशा बाकी न था,<br /> आज कर लिया मदिरापान साकी ने थाkhoyehttp://www.blogger.com/profile/07167813839368319662noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-18511618.post-1134003229027287722005-12-07T16:52:00.000-08:002005-12-07T16:56:17.856-08:00कभीमतलब के जीवन का क्षण ले<br />कभी खोज जीवन का अर्थ ले,<br />अपना बना लेने वालो को ले,<br />और कभी अपना बना ले,<br />कभी आप को खो कर किसी को पा ले,<br />कभी जीत को परे हटा ले,<br />कभी हार का उत्सव मना ले<br /><br />हर पल बीतेगा जीवन क्रिया के हल मे,<br />बस जा कभी जीवन पशचात के पल मे,<br />पाने के हिसाब मे है प्रमाण लगा,<br />कभी<em> <span style="color:#66ffff;">खोये</span></em><span style="color:#66ffff;"> </span>का अनुमान लगाkhoyehttp://www.blogger.com/profile/07167813839368319662noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-18511618.post-1133929300044382582005-12-06T20:20:00.000-08:002005-12-06T20:21:40.053-08:00मौसमआज सर्द हवा ने जिगर मे दर्द को सहला दिया,<br />थोडे से पानी ने ऊन मे लिपटी काया को जला दिया,<br />बर्फ के हर कतरे ने लबो को सूखा दिया<br />मेरे घर की छवि ने मेरा आसरा भूला दियाkhoyehttp://www.blogger.com/profile/07167813839368319662noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-18511618.post-1133708234253677882005-12-04T06:52:00.000-08:002005-12-04T07:07:52.950-08:00रहस्यखोना अनायास,<br />हरसम्भव प्रयास,<br />दूरी जटिल,<br />व्यवहार कुटिल,<br />वो पल विकराल,<br />विचारो का जाल,<br />अनन्य वर्तमान,<br />दूर्लभ सम्मान,<br />न भूत, न भविष्य,<br />परिष्क्रत जीवन रहस्यkhoyehttp://www.blogger.com/profile/07167813839368319662noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-18511618.post-1133234312179810202005-11-28T19:16:00.000-08:002005-12-04T06:58:15.836-08:00ढाई आखरकोरा कागज ले मैने लिखे थे आखर ढाई<br />कागज ने धार से फिर चीर एसे लगाई<br />लहु बहा कागज पर स्याही सा, पर कागज पर न टिकी एक बूँद<br />आखर ढाई लिखे रह गए, पर कागज ने कलम से ली अँखिया मूँदkhoyehttp://www.blogger.com/profile/07167813839368319662noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-18511618.post-1133031003694181912005-11-26T10:49:00.000-08:002005-12-04T06:59:08.040-08:00रात का कोहरामाना एक अरसा आस जगाता होगा,<br />कुछ बदल भी जाता होगा,<br />एक नया दिन होता होगा,<br />पर रात का कोहरा तो रहता होगा,<br />अन्तर को एक ठिठुरन तो देता होगाkhoyehttp://www.blogger.com/profile/07167813839368319662noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-18511618.post-1132854722807395652005-11-24T09:51:00.000-08:002005-11-24T09:52:02.816-08:00This is not mine but its neat.<br /><br />Jo duniya hoy kalo naag, to hu pan madaari chhu,<br />Pachhadu udta pankhi ne evo hu shikari chhu.<br />Chhu badshah betaaj aa aakhiye aalm no,<br />chhtay aapni ek mithi najar kaaje bhikhari chhu.khoyehttp://www.blogger.com/profile/07167813839368319662noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-18511618.post-1132853916583735102005-11-24T09:35:00.000-08:002005-12-04T07:00:00.633-08:00ठहरा मुकामकभी राह तकते मुकाम निकल जाए<br />कभी मुकाम देखते राह भटक जाए<br /><br />पर राह के खातिर मुकाम जो बदल ले<br /><br />तो राही पथ का हो जाए,<br />मुकाम राह देखता रह जाए,<br /><br />पर ए राही, समय बदल ले, तारतम्य बदल ले<br /><br />मुकाम तो तेरे लिए फिर ठहरा रह जाए,<br />पलटने का साहस ज़ो तेरे मे आ जाएkhoyehttp://www.blogger.com/profile/07167813839368319662noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-18511618.post-1132710856589612822005-11-22T17:53:00.000-08:002005-12-04T07:00:39.020-08:00वृक्ष का बलकल एक लता ने धरा पर घर कर लिया,<br />लता पनप गई और आज वृक्ष सिमट गया,<br />तना वृक्ष का देता था लता को सम्बल,<br />पर क्या लता मे समाहित था वृक्ष का बल ?khoyehttp://www.blogger.com/profile/07167813839368319662noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-18511618.post-1132380636688982622005-11-18T22:09:00.000-08:002005-12-04T07:02:40.370-08:00खोजनिकला आज राहो मे,<br />अस्तित्व कि खोज मे,<br />फिर आज शुन्य से रुबरु मै था,<br />मेरा वजूद तेरे परिचय से था<br /><br />शक्ल बदली या आईने बदल गये,<br />प्यादे बदले या नियम बदल गये,<br />रफ्तार बदली या विराम बदल गये,<br />मेरे होने के मायने बदल गयेkhoyehttp://www.blogger.com/profile/07167813839368319662noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-18511618.post-1132028886074940882005-11-14T20:27:00.000-08:002005-12-04T07:03:14.596-08:00ये कौन जाने ?रात के काले परदे गिर गए<br />आँखो के कोने फिर से भर गए<br />आज बुँदे गिरे या नही कौन जाने ?<br />हृदय के तार हिले या नही कौन जाने ?<br />कल का आलम क्या होगा कौन जाने ?<br />बस यह हाल फिर होगा,<br />हर सवाल फिर होगा,<br />अरमानो का कत्लेआम फिर होगा,<br />जाने या अनजाने ये कौन जाने ?khoyehttp://www.blogger.com/profile/07167813839368319662noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-18511618.post-1132027941655310302005-11-14T20:11:00.000-08:002005-12-04T07:04:36.690-08:00थामे रहेथामे रहे कशती औरो कि, अपना समझ कर<br />आया तुफान, ठहरे रहे मझधार मे रह कर<br />साहसी थे या नादान, शायद इसलिए रुके थे<br />धकेल कर, तुम किनारे जब चले थेkhoyehttp://www.blogger.com/profile/07167813839368319662noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-18511618.post-1131228831958179972005-11-05T14:12:00.000-08:002005-11-05T14:13:51.963-08:00शाम एक मन्दिर नित जाता था, आज भगवान उठ गये<br />मदिरालय का मुझे रास्ता पता था, आज कदम उठ गयेkhoyehttp://www.blogger.com/profile/07167813839368319662noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-18511618.post-1131155900057114712005-11-04T17:49:00.000-08:002005-11-04T17:58:20.056-08:00हम फिर वही पर सामन्जस्य बदल गया<br />रेत फिर वही पर सागर बदल गया<br />कल के निशानो पर आज की रेखा<br />कल के ताप पर आज की हवा<br />कल के पट पर आज का चित्र<br />क्या वक़्त रुकेगा या जीवन का समीकरण बद्ल गया ?khoyehttp://www.blogger.com/profile/07167813839368319662noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-18511618.post-1130811290609793512005-10-31T17:33:00.000-08:002005-11-22T19:20:53.520-08:00माना जिन्दगी मे तेरी जगह नही मेरे लिए, बस दर के बाहर रुक जाने दे,<br />समय का अगला झोका धकेल देगा, बस संभल भर जाने दे <br />क्षण मे क्षीण हुआ बल मेरा ना जाने क्यो,<br />कुछ नया नही, पर इस बार समझ कर जाने देkhoyehttp://www.blogger.com/profile/07167813839368319662noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-18511618.post-1130808113684299842005-10-31T17:19:00.000-08:002005-10-31T17:21:53.690-08:00उम्र गुज्ररी ढूडने मे वोह चन्द लोग जो बाद मरने के मेरे रोऍ<br />मलाल ये की बाद मेरे, मेरी जिन्दगी पर वोह सब रोऍkhoyehttp://www.blogger.com/profile/07167813839368319662noreply@blogger.com